दिवाली: रोशनी, उमंग और नई शुरुआत का पर्व
दिवाली, जिसे दीपावली भी कहा जाता है, भारत का एक प्रमुख और सबसे प्रसिद्ध त्यौहार है। यह पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर और बुराई से अच्छाई की ओर यात्रा का प्रतीक है। हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह त्योहार, न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया भर में बसे भारतीयों के लिए भी विशेष महत्व रखता है।
दिवाली का महत्व
दिवाली का धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक तीनों ही दृष्टियों से गहरा महत्व है। यह पर्व पांच दिनों तक चलता है और प्रत्येक दिन की अपनी विशेषता होती है। दिवाली के दिन लोग अपने घरों को दीपों, रंगोली और सजावट से सजाते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं और पटाखे चलाते हैं।
दिवाली का पौराणिक इतिहास
दिवाली से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं, जिनमें से सबसे प्रसिद्ध है:
भगवान राम की अयोध्या वापसी: ऐसा माना जाता है कि जब भगवान श्रीराम 14 वर्षों के वनवास के बाद रावण का वध कर अयोध्या लौटे थे, तो अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
नरकासुर वध और नरक चतुर्दशी: भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध कर 16,000 स्त्रियों को मुक्त किया था। इस दिन को ‘नरक चतुर्दशी’ कहा जाता है, जो दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाती है।
माता लक्ष्मी का प्रकट होना: समुद्र मंथन के समय दिवाली की रात माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसलिए इस दिन धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है।
दिवाली के पाँच दिन
धनतेरस – इस दिन धन, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) – बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक दिन।
दीपावली – मुख्य पर्व की रात, जब लक्ष्मी पूजन किया जाता है और घर दीपों से रोशन किया जाता है।
गोवर्धन पूजा – भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा से जुड़ा दिन।
भाई दूज – भाई-बहन के प्रेम का पर्व, जब बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
दिवाली कैसे मनाई जाती है?
घरों की साफ-सफाई व सजावट
दीयों और रंगोली से सजावट
नए वस्त्र धारण करना
मिठाइयों का आदान-प्रदान
लक्ष्मी-गणेश की पूजा
आतिशबाजी और पटाखे
एक पर्यावरण-संवेदनशील दिवाली
आज के समय में ज़रूरत है कि हम दिवाली को हरित (ग्रीन) और सुरक्षित तरीके से मनाएं। अत्यधिक पटाखों से प्रदूषण होता है जिससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। आइए इस बार दीयों की रोशनी, प्रेम की मिठास, और सामाजिक सद्भावना के साथ दिवाली मनाएं।
निष्कर्ष
दिवाली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह संस्कारों, परंपराओं और परिवारिक प्रेम का उत्सव है। यह हमें सिखाती है कि जीवन में चाहे जितना भी अंधकार हो, एक छोटा सा दीपक भी उसे दूर कर सकता है। इस दिवाली, आप भी अपने जीवन और समाज में सकारात्मकता का प्रकाश फैलाएं।
